యస్తు శాస్త్రీయ సంగీత సుధార్ణవ మతీతరత్।

శ్రీ వేంకట మఖీ ధీమాన్ నిత్యం జేగీయతే ధ్రువమ్।

यस्तु शास्त्रीय संगीत सुधार्णव मतीतरत्।

श्री वेंकट मखी धीमान् नित्यं जेगीयते ध्रुवम्।

यस्तु शास्त्रीय संगीत महार्णव मतीतरत्।

श्री वेंकट मखी धीमान् लोके जेगीयते ध्रुवम्।